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॥ पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर ॥
“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”

त्र्यंबकेश्वर में नारायण नागबली पूजा

narayan nagbali

गरुड़ पुराण के अनुसार, नारायण नागबली पूजा दो अलग-अलग विधियाँ हैं, जो दो विभिन्न कारणों से की जाती हैं। नारायण बली पूजा मुख्य रूप से असंतुष्ट पितरों की आत्मा को मुक्ति देने के लिए की जाती है, जबकि नागबली पूजा नाग या सर्प हत्या के पाप से मुक्ति के लिए की जाती है। नारायण नागबली एवं नारायण बली दोनों पूजाएँ केवल महाराष्ट्र के नाशिक के पास स्थित त्र्यंबकेश्वर में ही की जाती हैं।

त्र्यंबकेश्वर में स्थित शिवलिंग तीन मुखों का प्रतिनिधित्व करता है – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – जिससे यह स्थान धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है।

नारायण नागबली पूजा दो प्रकार की होती है – नारायण बली पूजा और नागबली पूजा। दोनों पूजाएँ अलग-अलग उद्देश्यों के लिए की जाती हैं।

नारायण बली पूजा और नागबली पूजा का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:

नारायण बली पूजा

यदि किसी व्यक्ति की अकाल या अस्वाभाविक मृत्यु हो जाती है, तो उसकी आत्मा एक निश्चित समय तक प्रेत योनि में भटकती रहती है। उस असंतुष्ट आत्मा की मोक्ष प्राप्ति हेतु जो विधि की जाती है, उसे “नारायण बली” कहा जाता है।

नारायण को असंतुष्ट आत्माओं का प्रतीक माना जाता है। नारायण बली करते समय पितरों का नाम और गोत्र उच्चारित नहीं किया जाता। इससे आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है।

नारायण बली पूजा करने से सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति, संतान सुख, स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक शांति एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है। इसलिए नारायण बली पूजा सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाने का प्रभावी उपाय है।

नागबली पूजा

nagbali puja

नागबली पूजा सर्प दोष से मुक्ति के लिए की जाती है। सर्प दोष के कारण संतान बाधा, स्वास्थ्य समस्याएँ, त्वचा रोग, ज्वर एवं उदर रोग उत्पन्न होते हैं।

शास्त्रों के अनुसार ८४ लाख योनियाँ हैं, जिनमें सर्प योनि का विशेष महत्व है। मानव और सर्प का संबंध महाभारत में स्पष्ट रूप से वर्णित है।

॥ संस्कृत श्लोक यथावत रखा गया है ॥

योग शास्त्र के अनुसार कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होने से आत्मज्ञान प्राप्त होता है। कुंडलिनी को सर्प रूप में दर्शाया गया है, इसलिए नाग और कुंडलिनी का स्वरूप समान माना जाता है।

जानबूझकर या अनजाने में सर्प या नाग की हत्या होने से सर्प दोष उत्पन्न होता है। इस दोष से मुक्ति के लिए नागबली पूजा की जाती है।

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नारायण नागबली पूजा विधि (प्रक्रिया)

Narayan Nagbali Puja

नारायण नागबली पूजा करने में तीन दिन लगते हैं।

पहले दिन श्रद्धालु कुशावर्त कुंड में पवित्र स्नान करते हैं और नए वस्त्र धारण करते हैं — पुरुष धोती तथा महिलाएं साड़ी पहनती हैं। पवित्र स्नान के बाद नारायण नागबली पूजा प्रारंभ होती है।

सबसे पहले प्रधान संकल्प लिया जाता है। भगवान विष्णु और भगवान वैवस्वत यम की दो प्रतिमाएं कलश में स्थापित की जाती हैं और सोलह उपचार विधियों से पूजा की जाती है। मधु, घी, तिल और चंदन से दस पिंड अर्पित किए जाते हैं। बाद में इन पिंडों का नदी या जलाशय में विसर्जन किया जाता है।

दूसरे दिन भी कुशावर्त कुंड में पवित्र स्नान किया जाता है। इसके बाद श्मशान में जाकर सपिंड श्राद्ध किया जाता है। तत्पश्चात गेंहू के आटे पर स्थापित नाग प्रतिमा की पूजा की जाती है, जो आठ दोषों के निवारण का प्रतीक है।

तीसरे दिन “स्वस्तिपुण्याहवाचन” विधि द्वारा अशुभता दूर करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। स्वर्ण नाग प्रतिमा की पूजा कर उसे पंडितजी को दान दिया जाता है। अंत में त्र्यंबकेश्वर मंदिर में अभिषेक पूजा की जाती है और श्रद्धालु व उनके परिवार को आशीर्वाद दिया जाता है।

महत्वपूर्ण: पूजा की अवधि 2 से 3 घंटे होती है। श्रद्धालुओं को पूजा से एक दिन पहले त्र्यंबकेश्वर पहुंचना चाहिए।

नारायण नागबली पूजा के लाभ

हिंदू धर्म के अनुसार पितृसेवा को अन्य सेवाओं से अधिक महत्व दिया गया है। नारायण बली पूजा करने से पितरों की आत्मा को मुक्ति मिलती है और उनके आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।

नारायण नागबली पूजा के लाभ इस प्रकार हैं:

  • अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  • व्यवसाय एवं करियर की इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
  • संतान संबंधी समस्याओं से जूझ रहे दंपत्तियों के लिए विशेष लाभकारी।
  • सर्प से जुड़े बुरे स्वप्नों से मुक्ति मिलती है।
  • अकाली मृत्यु प्राप्त पितरों की आत्मा से उत्पन्न बाधाएं समाप्त होती हैं।
  • नाग या सर्प हत्या के पाप से मुक्ति मिलती है।

त्र्यंबकेश्वर में नारायण नागबली पूजा का खर्च

नारायण नागबली पूजा का खर्च गुरुजी द्वारा उपयोग की जाने वाली पूजा सामग्री पर निर्भर करता है। पूजा विधि पूर्ण होने के बाद दक्षिणा भक्त की श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार दी जाती है।

सटीक मार्गदर्शन के लिए आप सीधे त्र्यंबकेश्वर के अधिकृत पंडितजी से संपर्क कर सकते हैं, जो वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा संपन्न कराते हैं। आप नारायण नागबली पूजा के लिए पंडितजी बुक भी कर सकते हैं।

त्र्यंबकेश्वर निम्नलिखित धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है — नारायण नागबली पूजा, कालसर्प दोष निवारण पूजा, कुंभ विवाह, महामृत्युंजय मंत्र जाप, रुद्राभिषेक, त्रिपिंडी श्राद्ध आदि।


FAQ's

मैं नारायण नागबली पूजा क्यों करूँ?
नारायण नागबली पूजा अस्वाभाविक मृत्यु हुए परिवार के सदस्य की आत्मा को मुक्ति देने के लिए तथा अनजाने में या जानबूझकर सर्प हत्या के कारण उत्पन्न पितृ दोष को दूर करने के लिए की जाती है।
नारायण नागबली पूजा कब करनी चाहिए?
नारायण नागबली पूजा अमावस्या, पूर्णिमा या द्वादशी जैसे शुभ दिनों में की जाती है, जैसा कि त्र्यंबकेश्वर के अनुभवी पुरोहितों द्वारा सुझाव दिया जाता है।
क्या नारायणबली और नागबली दो अलग-अलग पूजाएँ हैं?
हाँ, नारायणबली पूजा अस्वाभाविक मृत्यु हुए पूर्वजों के लिए की जाती है, जबकि नागबली पूजा सर्प हत्या के पाप के निवारण के लिए की जाती है। दोनों पूजाएँ मिलकर नारायण नागबली पूजा कहलाती हैं।
नारायण नागबली पूजा के क्या लाभ हैं?
यह पूजा पितृ दोष को दूर करती है, मृत आत्माओं को शांति प्रदान करती है, परिवार में सौहार्द बढ़ाती है तथा विवाह, करियर और संतान से जुड़ी बाधाओं को दूर करती है।
नारायण नागबली पूजा के दौरान क्या पहनना चाहिए?
पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी या सलवार पहननी चाहिए। काले रंग से बचना चाहिए।
नारायण नागबली पूजा केवल त्र्यंबकेश्वर में ही क्यों की जाती है?
त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और वेदों के अनुसार यह पूजा यहीं की जाती है।
नारायण नागबली पूजा कैसे की जाती है?
यह पूजा तीन दिनों तक अनुभवी वैदिक पुरोहितों के मार्गदर्शन में, उचित विधि, मंत्र, पिंडदान और सामग्री के साथ की जाती है।