“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”
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Rudraksha

FAQS

Rudraksha

नारायण नागबली

किसी व्यक्ति की अप्राकृतिक तरिके से मृत्यु हुई हो तो उसे मोक्ष दिलाने के लिए नारायण बली पूजा की जाती है, तथा नागबली पूजा सांप को मारने के पाप से मुक्त होने के लिए की जाती है।
अमावस्या , द्वादशी और पूर्णिमा के दिन पर त्र्यंबकेश्वर मंदिर में नारायण नागबली पूजा करना पुरोहितो द्वारा सुझाया गया है।
नारायण बली और नाग बली पूजा दोनों अलग अनुष्ठान है, जो ऊपर दिए गए अलग-अलग कारण के लिए किए जाते है।
यह पूजा करने से सभी पूर्वजो (जिनकी मृत्यु अप्राकृतिक तरीके से हुई है ) द्वारा निर्मित समस्याएं, शाप का नाश होता है, बुरे सपनों (अभिशाप और काले जादू ) से राहत मिलती है।
यह एक पुराणों में लिखी गयी पारंपरिक पूजा है जिसको पारंपरिक वस्त्र धारण करके ही करना चाहिए जैसे - पुरुषो के लिए धोती और महिलाओ के लिए साड़ी(सफेद रंग)।
प्राचीन हिंदू लेख धर्म सिंधु जिन्होंने बहुत से धार्मिक अनुष्ठानो का वर्णन किया है उनके के अनुसार नारायण नागबलि पूजा त्र्यंबकेश्वर मंदिर में ही करनी चाहिए क्योकि इसका संदर्भ "स्कन्द पुराण" और "पदम् पुराण" में भी किया गया है।
नारायण नागबली पूजा ये एक ३ दिन का अनुष्ठान है , जहा पुरोहितों द्वारा सुझाए गए पवित्र सामग्री को देवताओं को अर्पित किया जाता है, उनकी पूजा की जाती है।

कालसर्प योग दोष

जब बाकि सब ग्रह राहु और केतु के बिच में आते है, तब यह दोष का निर्माण होता है जो की नुकसान पोहचाने वाला दोष है।
किसी भी व्यक्ति के जीवन में यह दोष बहोत नुकसान पोहचाता है , ग्रहो की अनुचित व्यवस्था संबंधित व्यक्ति का जीवन अस्थिर बना देता है।
जिन लोगो के कुंडली में यह दोष है उनको कालसर्प योग शांतिपूजा करना अनिवार्य है जिससे ग्रह दोष ख़तम होता है।
यह एक ग्रह की अनुचित व्यवस्था से बना दोष है. इसका कुंडली में रहना पूरी तरह ग्रहो पे निर्भर रहता है, हालांकि यह कहा जाता है जब राहु प्रथम स्थान में कुंडली में हो तो वो २७ वर्ष आयु तक किसी व्यक्ति के कुंडली में रहता है।
१०८ बार पंचाक्षरी मंत्र ( ॐ नमः शिवाय) जाप , महामृत्युंजय मंत्र (" ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ, त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥") जाप करने से इस दोष का बुरा / हानिकारक प्रभाव कम होता है।
कालसर्प दोष शांति पूजा मुख्यतः ग्रहो के दोष को मिटाने के लिए करते है .जिसे करने के लिए ४ से ५ घंटे लग सकते है।
नाग पंचमी के दिन , या अमवस्या के दिन कालसर्प शांति पूजा करना उचित है।
तीन अलग अलग धातु से बनी सांप की मुर्तिया, और पूजा के लिए लगने वाले फूल, चंदन, आदि सामग्री।
कालसर्प दोष शांति पूजा कुल निधी पूजा में लगने वाली सामग्री पे निर्भर है।

त्रिपिंडी श्राद्ध

अपने मृत पूर्वजो की आत्माओ को मोक्ष दिलाने के लिए त्र्यंबकेश्वर में त्रिपिंडी श्राद्ध करके पितृ दोष का निवारण होता है।
यह एक योगदान है जो पैतृक आत्माओं की स्मृति में उनको शांत करने के लिए किया जाता है।
ये संस्कार श्रावण, पौष, कार्तिक, फाल्गुन, बैसाख के महीने में पंचमी, अष्टमी, एकादशी, तेरस, चौदस, अमावस के दिन किया जा सकता है।
यह एक अनुष्ठान है जो पितृ दोष से निर्मित समस्याओ को कम करने के लिए सुझाया जाता है।
इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए पूरा एक दिन लगता है . अगर यह किसी और पूजा के साथ में किया जाय तो ज्यादा समय लग सकता है।
त्रिपिंडी श्राद्ध को परिवार के पुरुष (आमतौर पर बड़ा बेटा) द्वारा किया जाता है। विवाहित और अविवाहित दोनों ही लोग इसे कर सकते है, लेकिन अकेली महिलाएं इस अनुष्ठान को नहीं कर सकती है।
श्राद्ध के दिनों में प्याज, लहसुन, जीरा, काला नमक और दाल जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, और संयम रखना अनिवार्य है।
तर्पण यह एक कार्य है जो अपने मृत पूर्वजो को खाना, पानी, चावल का भोग चढ़ाके उनके आत्माओ के शांति के लिए किया जाता है।
कोई भी व्यक्ति ( पुरुष और स्त्री ) इस विधि ( पिंड दान ) को कर सकता है।

महामृत्युंजय जाप

महामृत्युंजय जाप विधी पुरी करने के लिए साधारणतः ७ से ८ घंटे का कालावधी जरुरी है।
इस शक्तिशाली मंत्र का जाप व्यक्तिगत रूप से या फिर सामूहिक तरीके से भी किया जा सकता है, लेकिन सामूहिक तरीके से जाप करना अधिक लाभदायी होता है।
सभी ग्रह दोष के निवारण के लिए और भगवान शिवा के आशिर्वाद से किसी भी व्यक्ति के सुखी जीवन के प्राप्ति के लिए, यह मंत्र का जाप किया जाता है।
कार्तिक और श्रावण मास में अधिकतर यह महामृत्युंजय जाप माल विधी कीया जाता है।
महामृत्युंजय जाप सुबह ४ बजे ( ब्रह्म मुहूरत पे ) खाली पेट से करना चाहिए।
इस अनुष्ठान को करने के कुलनिधी पूरी तरह उसमे आवश्यक सामग्री पर निर्भर है।
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