“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”
floral design
Rudraksha

कालसर्प योग शांती

Rudraksha
roll roll
kaalsarp dosh puja

जब बाकि सब ग्रह राहु और केतु ग्रहों के बीच में आते है, तभी कालसर्प योग दोष निर्माण होता है। कालसर्प योग एक ऐसा दोष है जो ग्रहों की अव्यवस्थाओं द्वारा निर्माण होता है। इस दोष को दूर करने के लिए, त्र्यंबकेश्वर मंदिर (नासिक, महाराष्ट्र) में कालसर्प योग शांति पूजा करनी चाहिए।

यदि किसी भी व्यक्ति के जन्म कुंडली में कालसर्प योग है, तो विभिन्न प्रकार की समस्या उसके जीवन में आती है, जैसे व्यापार में विफलता, शिक्षा, नौकरी, शादी समस्या , असंतोष, नाखुशी, निराशा, रिश्तेदारों से झगड़ा या परिवार के साथ बहस आदि जैसे बहुत समस्याओ का सामना उस व्यक्ति को करना पड़ता है।

आपको इस दोष का निवारण नासिक के त्र्यंबकेश्वर यहाँ मिलेगा, कालसर्प दोष निवारण के लिए आपको "कालसर्प योग शांति पूजा" करना अनिवार्य है। । किसी भी कुंडली में कुल १२ स्थान और नौ ग्रह होते हैं। यदि सात ग्रह जैसे ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि, राहु और केतु के बाईं या दायी ओर स्थित हैं तभी कुंडली कालसर्प के योग में स्थित जानि जाती है।

काल सर्प योग के प्रकार

कालसर्प योग के अन्य विभिन्न प्रकारो का उल्लेख नीचे दिया गया है:

  • अनंत कालसर्प योग : अनंत कालसर्प योग तभी बनता है जब कुंडली में राहु और केतु क्रमशः प्रथम और सातवें स्थान पर होते है।
    (इस दोष का प्रभाव - जीवन में संघर्ष)
  • कुलिक कालसर्प योग : कुलिक कालसर्प योग तभी बनता है जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान क्रमशः दूसरा और आठवां होता है।
    (इस दोष का प्रभाव - खर्चा , परिवार के साथ बहस )
  • वासुकी कालसर्प योग : वासुकी कालसर्प योग तभी बनता है जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान तीसरा और नौवां होता है।
    (इस दोष का प्रभाव - परिवार के सदस्यों में विवाद).
  • शंखपाल कालसर्प योग : शंखपाल कालसर्प योग तभी बनता है जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान चौथा और दसवां होता है।
    (इस दोष का प्रभाव - संतान प्राप्ति से संबंधित समस्या )
  • पद्म कालसर्प योग : पद्म कालसर्प योग तभी बनता है जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान क्रमशः पांचवां और ग्यारहवां होता है।
    (इस दोष के प्रभाव - वित्तीय, शिक्षा की समस्याएं)
  • महापद्म कालसर्प योग : जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान छठा और बारहवां रहता है, तो यह महापद्म कालसर्प योग बनता है।
    (इस दोष का प्रभाव- शत्रुओं से तनाव)
  • तक्षक कालसर्प योग : जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान क्रमशः सातवां और प्रथम होता है, तभी यह तक्षक कालसर्प योग बनता है।
    (इस दोष का कारण प्रभाव - व्यक्ति के विवाहित जीवन में समस्या )
  • कर्कोटक कालसर्प योग: जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान क्रमशः आठवां और दूसरा होता है, तब यह कर्कोटक कालसर्प योग बनता है।
    (इस दोष का प्रभाव - व्यावसायिक समस्याएं)
  • शंखचूड कालसर्प योग शंखचूड कालसर्प योग तब बनता है जब कुंडली में राहु और केतु का स्थान क्रमशः नौवें और तीसरे स्थान पर होता है।
    (इस दोष का प्रभाव - आकस्मिक समस्याएं)
  • घटक कालसर्प योग जब किसी के कुंडली में राहु और केतु का स्थान क्रमशः दसवां और चौथा होता है, तो यह घाट कालसर्प योग कहा जाता है।
    (व्यापार में इस दोष के कारण प्रभाव होता है )
  • विशधर कालसर्प योग जब कुंडली में राहु और केतु क्रमशः ग्यारहवें और पांचवें स्थान पे होते है, तब यह विशद कालसर्प योग बनता है।
    (इस दोष के प्रभाव - जीवन में संघर्ष, पारिवारिक सदस्यों में विवाद)
  • शेषनाग कालसर्प योग जब कुंडली में राहु और केतु क्रमशः बारहवां और छठे स्थान पर होते है, तो यह शेषनाग कालसर्प योग बनता है।
    (इस दोष का प्रभाव - स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं)

यह काल सर्प योग शांति पूजा सभी इच्छाओं को पूरा करने के लिए और सभी कठिनाइयों को दूर करने के लिए सिर्फ नासिक त्र्यंबकेश्वर मंदिर में की जाती है। यह पूजा विधि अनुष्ठान और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद शारीरिक पाप, बोले गए पाप, और अन्य पाप दूर हो जाते है।

कालसर्प योग शांति पूजा करने के विभिन्न कारण

बहुत से लोग जानते हैं कि उनकी कुंडली में कालसर्प दोष है, लेकिन ये जानने के बाद भी इसकी उपेक्षा करते हैं, तभी जीवन में वास्तविक कठिनाइयां शुरू हो जाती हैं।

सफल होने के लिए, समाज में अपना नाम और पहचान बनाने के लिए, व्यक्ति की कुंडली में इस दोष को खत्म होना आवश्यक है जो की कालसर्प योग शांति पूजा करने से होता है।

कालसर्प योग शांति पूजा सभी मनोकामनाओं और इच्छा को पूरा करने के लिए की जाती है। समय के अनुसार दोष का हानिकारक प्रभाव बढ़ता है तो जैसे ही किसी को उनकी कुंडली में इस दोष के बारे में पता चले तो इस "कालसर्प योग शांति पूजा" को नासिक में स्थित त्र्यंबकेश्वर में सपन्न करना चाहिए।

कालसर्प योग शांति पूजा प्रक्रिया

कालसर्प योग शांति पूजा में प्रथम प्रतिज्ञा करते है जिससे हम भगवान से शुभ फल प्राप्त करने और सभी दोषों को बाहर निकालने की प्रार्थना करते हैं। अच्छी सेहत पाने के लिए व्यक्ति को सूर्य की

उपासना करनी अनिवार्य है। मन की शांति पाने के लिए, सभी को दीप, चंद्रमा, और वर्षा के देवता (भगवान वरुण) की उपासना करनी अनिवार्य है। जिसमें सभी पुण्य नदियों, समुद्रों और पवित्र तीर्थ स्थान होते हैं, जिन्हें मनुष्य के सांस, जीवन के रूप में माना जाता है।

प्रथम व्रत के बाद, सबसे पहले भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है क्योकि धर्मशास्त्र के अनुसार किसी भी अवसर या अनुष्ठान को शुरू करने से पहले भगवान श्री गणेश जी की पूजा करना अनिवार्य है। भगवान श्री गणेश बुद्धि के देवता जो हमें एक अनोखी बुद्धि प्रदान करते है और साथ ही वे हमारे जीवन में सभी प्रकार की कठिनाइयों को दूर करते हैं।

कालसर्प योग शांति पूजा करने से, समृद्धि, धर्म कल्याण, वृद्धि, और धन की प्राप्ति हमारे पूरे परिवार के लिए भगवान और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से प्राप्त किया जा सकते हैं।

कालसर्प योग शांति पूजा

nagbali puja

जीवन में कालसर्प दोष के हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए, यह कालसर्प शांति पूजा सम्पन्न की जाती है। कोई भी व्यक्ति जो इस दोष से पीड़ित है इस पूजा को स्वयं कर सकता है, यदि प्रभावित व्यक्ति बहुत छोटा है तो माता-पिता इस पूजा को कर सकते हैं।

जैसे ही कोई अपनी जन्म कुंडली में इस दोष के बारे में पता चलता है तब यह कालसर्प शांति पूजा को त्र्यंबकेश्वर मंदिर में करना चाहिए। इससे वह व्यक्ति सभी प्रकार के कठिनाइयों से मुक्त होता है।

अन्य बारह कालसर्प योग पूजा प्रकारों के साथ राहु-काल सर्प योग पूजा त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कि जाती है।

ऊपर दिए गए अन्य बारह कालसर्प योग पूजा प्रकारों (अनंत काल सर्प योग, कुलिक कालसर्प योग, वासुकी काल सर्प योग, शंखपाल काल सर्प योग, पद्म काल सर्प योग, महा पद्म काल सर्प योग, तक्षक काल सर्प योग, शंखचूड़ काल सर्प योग, कर्कोटक काल सर्प योग, घातक काल सर्प योग, विषधर काल योग, शेषनाग काल सर्प योग) के साथ राहु-काल सर्प योग पूजा त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कि जाती है।

दोनों ग्रह (राहु और केतु) अन्य ग्रहो की तरह दिखाई नहीं देते, लेकिन जब सभी नौ ग्रह (ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि, राहु और केतु ) राहु और केतु ग्रहों के बीच आते हैं तो यह दोष का निर्माण होता है। राहु ग्रह पिछले जन्म के कर्मों को दर्शाता है। काल राहु ग्रह के "अभिदेवता" और सर्प (साँप) उसके "प्रतिदेवता" (उप-देवता) माने जाते है। यह अनुष्ठान करने से किसी भी व्यक्ति को ग्रहों से आशीर्वाद प्राप्त होकर सभी दोष दूर हो जाते है।

सर्वोच्च देवता भगवान शिव की साधना

भगवान शिव (त्र्यंबकेश्वर) प्रमुख और सर्वोच्च देवता हैं वे क्रोध के देवता के रूप में जाने जाते हैं जो बुराई का सर्वनाश करते हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार, भगवान त्र्यंबकेश्वर की पूजा करना हर प्रकार की कालसर्प शांति पूजा और यज्ञ में अनिवार्य है, जिससे प्रमुख देवता का आशीर्वाद प्राप्त हो कर और सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते है।

उत्तर पूजा

बलिदान पुर्णाहुति या उत्तर पूजा यह "कालसर्प शांति पूजा" का अंतिम अनुष्ठान है। किसी भी व्यक्ति के सभी पवित्र कर्म और किये गए अनुष्ठान भगवान श्री त्र्यंबकेश्वर को समर्पित हैं, जिससे अनुष्ठान करने वाले को सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

nagbali puja

कालसर्प योग दोष के दुष्परिणाम

किसी भी व्यक्ति अगर इस दोष से पीड़ित है, तो उसे कालसर्प योग शांति पूजा करना अनिवार्य है। यदि सम्बंधित व्यक्ति ने कालसर्प योग शांति पूजा अनुष्ठान नहीं किया तो उसे निचे दिए गए दुष्परिणामों का सामना करना पड सकता है:

  • सफलता के लिए संघर्ष।
  • समाज में अनादर।
  • विवाह संबंधित मुश्किलें।
  • सबंधित कार्य क्षेत्र मे स्थिर विकास।

कालसर्प योग शांति पूजा कालावधी

कालसर्प योग शांति पूजा के लिए संबंधित व्यक्ति को पूजा से पहले शुद्धिकरण विधि के लिए पवित्र कुशावर्त कुण्ड में पवित्र स्नान करना और व्रत का पालन करना अनिवार्य है। पुरोहितों द्वारा यह सुझाव दिया जाता है की कालसर्प योग शांति पूजा अनुष्ठान पूरा करने के लिए कुलविधि २ से ३ घंटे आवश्यक है, लेकिन संबंधित व्यक्ति पूजा के १ दिन पहले ही त्र्यंबकेश्वर मंदिर उपस्थित रहे।

कालसर्प योग शांति अनुष्ठान करते समय कौणसे वस्त्र प्रधान करने चाहिए?

पुरोहितो द्वारा यह सुझाव दिया जाता है कि, कालसर्प योग शांति पूजा करते समय पुरुषों को धोती कुर्ता और महिलाओं को साड़ी (काले, हरे जैसे रंग के अलावा) पहननी चाहिए। कहा जाता है कि इस अनुष्ठान के लिए काले और हरे रंगों के वस्त्र वर्ज है।

त्र्यंबकेश्वर पंडितजी


FAQ's

जब बाकि सब ग्रह राहु और केतु के बिच में आते है, तब यह दोष का निर्माण होता है जो की नुकसान पोहचाने वाला दोष है।
किसी भी व्यक्ति के जीवन में यह दोष बहोत नुकसान पोहचाता है , ग्रहो की अनुचित व्यवस्था संबंधित व्यक्ति का जीवन अस्थिर बना देता है।
जिन लोगो के कुंडली में यह दोष है उनको कालसर्प योग शांतिपूजा करना अनिवार्य है जिससे ग्रह दोष ख़तम होता है।
यह एक ग्रह की अनुचित व्यवस्था से बना दोष है. इसका कुंडली में रहना पूरी तरह ग्रहो पे निर्भर रहता है, हालांकि यह कहा जाता है जब राहु प्रथम स्थान में कुंडली में हो तो वो २७ वर्ष आयु तक किसी व्यक्ति के कुंडली में रहता है।
१०८ बार पंचाक्षरी मंत्र ( ॐ नमः शिवाय) जाप , महामृत्युंजय मंत्र (" ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ, त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥") जाप करने से इस दोष का बुरा / हानिकारक प्रभाव कम होता है।
कालसर्प दोष शांति पूजा मुख्यतः ग्रहो के दोष को मिटाने के लिए करते है .जिसे करने के लिए ४ से ५ घंटे लग सकते है।
नाग पंचमी के दिन , या अमवस्या के दिन कालसर्प शांति पूजा करना उचित है।
तीन अलग अलग धातु से बनी सांप की मुर्तिया, और पूजा के लिए लगने वाले फूल, चंदन, आदि सामग्री।
कालसर्प दोष शांति पूजा कुल निधी पूजा में लगने वाली सामग्री पे निर्भर है।
whatsapp icon