॥ पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर ॥
“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”

नारायण नागबली पूजा के फायदे

नारायण नागबली पूजा पितृ दोष तथा नाग हत्या के पातक से मुक्ति पाने के लिए की जाती है। नारायण नागबली पूजा कराने के लिए त्र्यंबकेश्वर में परंपरागत अधिकार प्राप्त ताम्रपत्रधारी गुरूजी है, जिन्हे तीर्थ पुरोहित भी कहा जाता है। यह पूजा त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पूर्व दरवाज़े के समीप स्थित अहिल्या गोदावरी मंदिर एवं सति महाश्मशान में की जाती है। इस पूजा में दो पूजा एकत्रित रूप में की जाती है, जिन्हें नारायण बली पूजा एवं नागबलि पूजा कह जाता है। हमारे परिवार में पूर्वजों की मृत्यु कौनसे कारणवश हुई है इसकी निश्चित जानकारी न होने से यह दोनों पुजाएँ एकसाथ की जाती है।

नारायण नागबली पूजा के फायदे:

१) नारायण नागबली पूजा करने से हमारे परिवार के अतृप्त पित्रों को मुक्ति मिलने में सहायता मिलती है। जिस कारण हमें पूर्वजों द्वारा आशीर्वाद मिलता है एवं पितृ दोष मिटता है।

२) जिस व्यक्ति के परिवार में पितृ दोषका प्रादुर्भाव होता है, ऐसी व्यक्ति चाहे जितना भी परिश्रम करले उसकी मेहनत को उसकी आर्थिक प्रगति सिद्ध नहीं होती। आर्थिक बचत कम और खर्चा जरुरत से ज़्यादा होनेसे व्यक्ति मनस्ताप से ग्रस्त होता है। ऐसे व्यक्ति द्वारा नारायण नागबली पूजा करने से यह पितृ दोष मिट जाता है।  

३) जिस परिवार में पितृ दोष होता है वहाँ कोई भी व्यापार उन्नत नहीं होता। जिस कारण आर्थिक तंगी होती है। ऐसे में नारायण नागबली पूजा के उपरांत व्यापार में आर्थिक विकास होता है। 

४) जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में पितृ दोष होता है, उस व्यक्ति को संतान सुख नहीं मिलता या कम मिलता है। ऐसे में नारायण नागबली पूजा करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। एवं संतति का आरोग्य भी उत्तम होता है। 

५) जिस परिवार में पितृ दोष होता है वहाँ हररोज़ झगड़ा, क्लेश या घरेलू हिंसा होती है। नारायण नागबली पूजा करने से पितृ दोष दूर होकर परिवार में कलह मिट जाते है आपसी मतभेद दूर होते है। 

६) जब कभी जमीन की खरीद एवं बिक्री से जुड़ा फैसला लेना होता है, तब स्वप्न में नाग की आत्मा दिखाई देती है, जो पूर्वजों द्वारा अर्जित की गयी भूमि पर नाग की मृत्यु होने से भटकती है। इसीलिए ज़मीन संबंधित सभी व्यवहार थम जाते है। ऐसे में नारायण नागबलि पूजा करने से पितृ दोष का निवारण होता है एवं नाग की आत्मा को शांति मिलती है। जिसके फलस्वरूप ज़मीन जायदाद से जुड़े सभी रुके हुए व्यवहार पूर्ण होते है।  

७) जिस परिवार के पूर्वजों की आकस्मिक ढंग से मृत्यु हुई है, उनकी विधिवत रूप से श्राद्ध होना आवश्यक है। ऐसा न होने से परिवार के किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना होती है। नारायण नागबली पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलने से अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है एवं व्यक्ति को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। 

८) जिस व्यक्ति को पितृ दोष की बाधा होती है, उस व्यक्ति के स्वप्न में उसके परिवार के मृत सदस्य स्वप्न में आकर खाना और पानी माँगते है। साथ ही नाग पीछा कर रहा है या शरीरपर रेंग रहा है ऐसे भी स्वप्न में दिखाई देता है । नारायण नागबलि पूजा के फलस्वरूप पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा बुरे और डरावने स्वप्न भी दिखाई देना बंद हो जाता है। 

९) किसी भी परिवार में जब घर की लक्ष्मी यानि गृहलक्ष्मी आनंद में रहती है वहाँ श्री, संपत्ति, समाधान एवं शांति का वास सदा रहता है। बार-बार होनेवाले झगड़े, तनाव आदि के वजह से ऐसी स्त्री अप्रसन्न रहती है। उसमें असुरक्षा का भाव निर्माण होता है, जिसकी वजह से भय एवं चिंता उसे घेर लेती है। शास्त्रों के अनुसार नारायण नागबली पूजा कराने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, जिसकी वजह से घर की खोई शांति फिर लौट आती है।      

१०) नारायण नागबली पूजा कराने से परिवार में जन्मे नवजात बालक यानी वर्त्तमान पीढ़ी को पितृ दोष की बाधा नहीं होती।

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