॥ पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर ॥
“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”

कालसर्प योग के लक्षण और उपाय

कालसर्प योग क्या है?

काल का अर्थ है समय और सर्प का अर्थ है साँप। कालसर्प योग में राहु (साँप का सर) और केतु (साँप की पुंछ) के बिच बाकी ग्रह आते है, जिसकी वजह से व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कालसर्प योग में राहु की देवता काल है एवं केतु की देवता सर्प होने से यह योग दीर्घ समय के लिए जन्मकुंडली में बना रहता है। कालसर्प योग की स्थिति में व्यक्ति की जन्मकुंडली में प्रथम भाव में राहु स्थित हो, तो सप्तम भाव में केतु होता है, तथा अन्य सभी ग्रह इन दोनों के बिच होते है।  

कालसर्प दोष कितने वर्ष तक रहता है?

कालसर्प योग पूर्ण रूप में यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थापित हो जाए तो यह ५५ साल तक बना रहता है।

कालसर्प योग के लक्षण 

  • कालसर्प योग के प्रभाव से व्यक्ति को हमेशा डरावने स्वप्न आते है, सपने में अक्सर साँप पीछे पड़ा है ऐसा दिखाना।  
  • व्यक्ति को स्वप्न में अपने आप को नदी या जलाशय या समुद्र के पानी में डूबते हुए दिखाई देना।
  • स्वप्न में मकान या इमारत गिरते हुए दिखना। 
  • हमेशा कुछ बुरा ही होगा ऐसा भय मन में बन जाना।  
  • स्वप्न में विधवा स्त्री दिखाई देना।  
  • व्यक्ति को गुप्त रोग, उदर रोग, या वात रोग की परेशानी हो जाना। 
  • विवाह होने में देरी होना, विवाह के बाद झगड़े होना, तलाक की संभावना बन जाना।
  • संतानप्राप्ति में देरी होना, अल्प संतति होना या संतान मतिमंद होना।
  • मानसिक अशांति से पीड़ा होना या मानसिक रोग का शिकार होना।
  • शिक्षा प्राप्त होने में परेशानियां आना या शिक्षा का स्थान बार बार बदलना।
  • आर्थिक स्थिति डावांडोल रहना, आय की अपेक्षा खर्च अधिक होना।
  • अदालत में षड़यंत्रों व् मुकदमों का सामना करना पड़ना।
  • नौकरी में अधिक परिश्रम करने के बावजूद पदोन्नति रुक जाना। 
  • रोजमर्रा की जरूरते पूरी करने के लिए आजीविका कम पड़ना।
  • मित्र तथा आप्तजनों द्वारा छला जाना, धोखा खाना।
  • माता पिता से मिलने वाले स्नेह में कमी आ जाना।
  • संपत्ति, घर, जमीन, जायदाद संबंधी मामलों में अपनो द्वारा धोखा मिलना। 

कालसर्प योग के उपाय

  • कालसर्प योग के प्रभाव को कम करने के लिए घरी एवं दुकानमें मोरके पंख लगाने चाहिए।
  • स्कन्दपुराण में वर्णित राहु स्तोत्र एवं केतु स्तोत्र का नित्य पाठ करना चाहिए। 
  • “ॐ रां राहवे नमः” इस राहु मंत्र का हररोज १०८ बार जप करना चाहिए। 
  • “ॐ कें केतवे नमः” इस केतु मंत्र का हररोज १०८ बार जप करना चाहिए। 
  • नागपंचमी के दिन व्रत रखकर ५ ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
  • नाग की आकृति वाली अष्टधातु से निर्मित अंगूठी अनामिका अर्थात छोटी उंगली के पास वाली उंगली में नागपंचमी के दिन धारण करनी चाहिए। 
  • गोमेद की अंगूठी कालसर्प दोष का प्रभाव कम करती है। गोमेद को चांदी में जड़वाकर शाम के समय विधिनुसार बीच की उंगली में धारण करना लाभदायक है। 

त्र्यंबकेश्वर कालसर्प दोष पूजा

नासिक के पास स्थित त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प योग दोष निवारण पूजा एवं अनुष्ठान करवाने से कालसर्प का दोष प्रभाव हमेशा के लिए दूर हो जाता है। कालसर्प योग दोष निवारण पूजा त्र्यंबकेश्वर में ताम्रपत्रधारी पण्डितजी द्वारा शुभ मुहूर्त पर कराई जाती है। कालसर्प योग दोष निवारण पूजा मुहूर्त की जानकारी के लिए आप त्र्यंबकेश्वर पण्डितजी से संपर्क कर सकते है।  

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जानिए कालसर्प दोष निवारण पूजा, मुहूर्त, सामग्री, प्रकार और फायदे

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