॥ पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर ॥
“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”

पितृ दोष निवारण विधि, सामग्री, मंत्र, तिथि मुहुर्त और उपाय

पितृ दोष क्या होता है?

पितृ दोष क्या होता है? पितृ दोष यह व्यक्ति को अतृप्त पित्रों द्वारा उद्भव होने वाला दोष है। यदि हमारे परिवार के किसी सदस्य की समय से पहले मृत्यु होती है और उसका विधिवत अंतिम संस्कार न किया गया हो या उसकी कोई इच्छा अधूरी रह गई हो तो उसकी आत्मा को जन्म नहीं मिलता। आत्मा पितृलोक में भटकती है, जहाँ उसे यातनाएँ झेलनी पड़ती है। साल में एक बार पितृ पक्ष में यमराज की आज्ञा पाकर इन पूर्वजों की आत्माएँ पृथ्वी लोक पर अपने वंशजों के पास खाना पाने की इच्छा से आती है। यह खाना श्राद्ध एवं तर्पण के माध्यम से पितृ लोक तक पहुँचाया जाता है। वंशजों को दिए गए अन्न द्वारा पित्रों को पितृ लोक में ऊर्जा प्राप्त होती है। ऐसे में अगर वंशजों को अपने पूर्वजों के प्रति आस्था ना हो या सम्मान ना हो, तब यह आत्माएँ धरती पर प्रेत योनि में अटक जाती है, जहाँ उन्हें यातनाएँ होती है। यातनाओं के कारण वह अपने वंशजों को शाप देती है, जिसे पितृ शाप भी कहा जाता है। पितृ शाप के कारण वर्त्तमान पीढ़ी को अनेक कष्ट भोगने पड़ते है, जिस कारण उनकी संपत्ति में कमी होने लगती है, धन का अभाव, रोग एवं बीमारियां होने लगती है, जिसे पितृ दोष कहा जाता है।   

पितृ दोष के लक्षण

  • परिवार के पूर्वजों स्वप्न में बार बार दिखाई देना।  
  • संतान प्राप्ति में परेशानियां या देरी होना।
  • पितृ दोष के कारण व्यक्ति के परिश्रम का फल उसे देरी से मिलता है या सफलता नहीं मिलती। 
  • शादी में विलंब होता है या रुकावटे आती है। यदि शादी हो भी जाए तो किसी कारणवश टूट जाती है। 
  • घर से अजीब सी दुर्गंध आना।
  • पितृ दोष के प्रभाव से घर में छोटी सी बात से कलह होता है और अशांति का वातावरण बनता है। 
  • व्यक्ति को धन संबंधी परेशानियाँ तंग करती है, आय कम और खर्चा अधिक होता है।
  • यात्रा के दौरान व्यक्ति की वाहन दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
  • पितृ दोष के कारण अकाल मृत्यु का भय बना रहता है।
  • पितृ दोष के कारण व्यक्ति को लाइलाज बिमारी हो सकती है। 
  • त्यौहार के दौरान कुछ अमंगल या अशुभ घटना होना। 
  • जिस घर में पितृ दोष होता है, वहाँ के बच्चे शिक्षा में हमेशा पीछे पड़ जाते है। 

पितृ दोष कैसे पता चलेगा?

पितृ दोष का पता जन्मपत्रिका के अनुसार लगाया जाता है। जन्म पत्रिका में लग्न ,पंचम ,अष्टम और द्वादश भाव से पितृदोष देखा जाता है। ग्रहों में राहु या केतु की सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और शनि के साथ युति होने पर पितृ दोष का पता लगता है। 

पितृ दोष उपाय

  • जिस घर में पितृ दोष होता है वहाँ भोजन बनते ही प्रथम गो ग्रास (गाय की रोटी) बनाकर गाय को भोजन खिलाना चाहिए।  
  • पितृ दोष निवारण के लिए सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पित्रों की शांति के लिए प्रार्थना किया जाना आवश्यक है।
  • सूर्योदय के समय कच्चा दूध, तिल, जौ तथा साबुत चावल को मिलाकर जलाशय के स्वच्छ बहते पानी में या नदी में बहाने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है। 
  • पितृ दोष निवारण के लिए शनिवार के दिन पीपल या बरगद की जड़ में गंगा जल, जौ तथा काला तिल चढ़ाएँ।
  • हर अमावस्या के दिन गाय के गोबर से बने कंडे की धूनी लगाकर उसे पर खीर, घी, जौ, चावल एवं तिल मिलाकर दक्षिण दिशा में पित्रों का आवाहन करके उनसे क्षमायाचना करनी चाहिए एवं मुक्ति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।
  • वास्तु में पितृ दोष का असर दिखने पर कोई भी मंगल कार्य करने से पहले श्रीमद्भगवद्गीता या श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ करना चाहिए।
  • पित्रों की शांति के लिए किसी तीर्थ पर जाकर जल से तीन बार तर्पण करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
  • प्रति वर्ष वार्षिक श्राद्ध करने से पित्रों को संतोष होता है, तथा वे आशीर्वाद देते है। इस आशीर्वाद के प्रभाव से पितृ दोष कम होने में राहत मिलती है। 
  • आश्विन अमावस्या के दिन सर्वपितृश्राद्ध करने से परिवार के सभी पूर्वजों को शांति मिलती है। 
  • घर में जहाँ पीने का पानी रखा जाता है, उस स्थान पर हररोज़ शाम को शुद्ध घी का दीपक जलाने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।।

त्रम्बकेश्वर में पितृ दोष पूजा

पितृ दोष पूजा पुरोहित संघ पण्डितजी द्वारा त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में की जाती है। यह पूजा भारत में अन्य स्थानों पर भी की जाती है, लेकिन त्र्यंबकेश्वर में स्वयं गंगा माँ का प्रकट स्थान है। तथा त्र्यंबकेश्वर में त्रिदेवों का एकत्रित बना ज्योतिर्लिंग है, इसलिए त्रिम्बकेश्वर में पूजा करना अधिक प्रभावशाली माना जाता है। 

पितृ दोष पूजा विधि

  • पितृ दोष निवारण पूजा के लिए आप को कम से कम एक दिन पहले त्र्यंबकेश्वर में आना अनिवार्य है।
  • पितृ दोष पूजा ३ दिन की होती है, जिसमे पण्डितजी द्वारा संकल्प, पिंडदान, तर्पण, श्राद्धादि कार्य संपन्न कराये जाते है।  
  • इस पूजा के आरम्भ से लेकर समाप्ति तक आप को त्र्यंबकेश्वर में ही रुकना पड़ता है, अन्यथा संकल्प अधूरा रह जाता है। इसी कारण से आपका त्र्यंबकेश्वर छोड़कर दूसरे किसी स्थान पर नहीं जाना ठीक नहीं है।   
  • पूजा के तीसरे दिन दोपहर तक श्राद्धकर्ता पूजा स्थल से बाहर जा सकता है। 
  • इस पूजा के नियमानुसार पूजा में उपस्थित परिवार के सदस्यों को ४१ दिन तक मांस, शराब सेवन नहीं करना है। 
  • यह पूजा विवाहित जोड़े द्वारा की जाती है, अकेले महिला यह पूजा नहीं कर सकती। 
  • पूजा में बैठने वाले पुरुष को सफेद धोती, कुरता तथा महिलाओं को सफेद रंग की साड़ी पहनना अनिवार्य है।
  • पूजा के दिनों में प्याज तथा लहसुन से बना हुआ भोजन खाना वर्ज्य है।
  • पूजा समाप्ति के बाद पूजा की दक्षिणा तथा दान देकर आशीर्वाद लिया जाता है।

पितृ दोष पूजा सामग्री

गंगाजल, शहद, चीनी, हवन पुडा, समिधा, आम की लकड़ी, आम के पत्ते, शुद्ध घी, जनेऊ, रक्षा सूत्र, गोबर के कंडे, कपूर, हल्दी, रोली या कुमकुम, मिष्ठान, कलावा, पंचरंगी नाडा, गुलाबी कपड़ा, पांच प्रकार के फल, और पांच प्रकार की मिठाई।

पितृ दोष निवारण मंत्र

ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः 

१०८ बार इस मंत्र का जाप करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

पितृ दोष निवारण पूजा लाभ

  • पितृ दोष निवारण पूजा के प्रभाव से व्यक्ति की अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है।
  • आर्थिक तंगी दूर होकर धन की जरुरत पूरी होने में सहायता होती है। 
  • शुभ कार्य करते समय सब काम उचित होते है, कोई भी अमंगलता नहीं होती।
  • घर में प्रसन्नता महसूस होती है।
  • भाईचारा ठीक रहता है, परिवार में मनमुटाव दूर होते है। 
  • संतान प्राप्ति में आने वाली कठिनाइयाँ और सारी बाधाएँ दूर होती है। 
  • इस पूजा से व्यक्ति के मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है। 
  • बच्चों की पढ़ाई में आ रही सभी परेशानियाँ हल होती है। 
  • घर में धन-धान्य में वृद्धि होती है।
  • पित्रों का आशीर्वाद मिलने से आरोग्य में सुधार होता है।

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जानिए पितृ दोष पूजा विधि English में 

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पितृ दोष निवारण पूजा मुहूर्त

यह पूजा शास्त्र विधिद्वारा विशिष्ट मुहूर्त पर संपन्न की जाती है। पितृ दोष पूजा मुहूर्त की जानकारी के लिए आप त्र्यंबकेश्वर स्थित ताम्रपत्रधारी पण्डितजी से संपर्क कर सकते है।

पितृ दोष पूजा की दक्षिणा

पितृ दोष पूजा में उपयोग होने वाली पूजा सामग्री एवं कितने पण्डितजी द्वारा पूजा की गयी है इस पर पूजा की दक्षिणा निर्धारित होती है।

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