॥ पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर ॥
“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”

kaal Sarp Puja Benefits in Hindi | कालसर्प दोष पूजा के लाभ

आज हम कालसर्प दोष पूजा के लाभ के बारे जानने वाले है। कालसर्प योग जन्मपत्रिकामें दिखाई देनेवाला योग है, जब जन्म के समय राहु और केतु गृह आमने सामने होकर बाकी ग्रह इन दोनों के बीच होते है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसीलिए यह दोष भी माना जाता है। इस योग की विधिनुसार शांति करवाने से उचित लाभ मिलता है। पितृ दोष के निवारण के लिए त्र्यंबकेश्वर पण्डितजी (नासिक) द्वारा कालसर्प योग दोष पूजा की जाती है। यह पूजा के बाद व्यक्ति को ग्रहों द्वारा अच्छा परिणाम प्राप्त होता है, सारे ग्रह दोष मिट जाते है। 

कालसर्प दोष पूजा के लाभ

  • कालसर्प योग दोष पूजा के बाद राहु तथा केतु ग्रह अच्छी स्थिति में आते है, ऐसा व्यक्ति कालसर्प योग के शुभ फल प्राप्त होता है, जो आगे दिए है –
  • जिस व्यक्ति की कुंडली में राहु और चंद्रमा की स्थिति अच्छी हो ऐसा व्यक्ति पूजा के पश्चात प्रोफेसर, वैज्ञानिक तथा स्कॉलर के रूप में उभरता हैं। ऐसे में अगर राहु व चंद्रमा की युति  पहले, चतुर्थ, दशम भाव में या त्रिकोण में हो जाती है तब व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि से जुडी सभी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं।
  • कालसर्प योग शांति पूजा के बाद यदि व्यक्ति मेष, वृश्चिक या मकर राशि का हो और मंगल जन्मकुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम स्थान पर हो तब रुचक योग का पूर्ण लाभ मिलता है। ऐसे व्यक्ति को हवाईदल, नौसेना, मिलिटरी, पुलिस दल तथा अन्य साहसपूर्ण कार्यों में ऊँचे पद की प्राप्ति होती हैं।
  • जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में कालसर्प के मुख में बुध ग्रह स्थित हो तो शांति पूजा के बाद ऐसे व्यक्ति उच्च शिक्षा को प्राप्त करते हैं। जिस कारण उनके जीवन में तरक्की के नए आयाम स्थापित होते हैं। बुधादित्य योग के पूर्ण लाभ से ये संभव होता हैं।
  • कालसर्प योग में स्वराशि तथा उच्च राशि में स्थित गुरू होने पर राहु के साथ गजकेसरी योग का पूर्ण लाभ मिलता है। कालसर्प योग शांति पूजा के बाद यदि राहु छठे भाव में हो तथा बृहस्पति केंद्र या दशम भाव में स्थित हो तब व्यक्ति को जीवनयापन में धन-धान्य की जरा भी कमी नहीं होती। प्रपंच अच्छे से बना रहता है।  
  • कालसर्प योग की शांति होने के बाद यदि कालसर्प के मुख में शुक्र ग्रह शुभ स्थिति में आता है, तब व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में आनंद की प्राप्ति होती है। जब शुक्र दूसरे या बारहवें भाव में स्थित हो तब व्यक्ति को मनोवांछित फल देता हैं। मालव्य योग का निर्माण होने पर यानी शुक्र जब अपनी राशि में स्थित हो या उच्च राशि में केंद्र में स्थित हो तब व्यक्ति को अपना पसंदीदा जीवन साथी प्राप्त होता है एवं विवाह पश्चात उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
  • कालसर्प योग शांति पूजा के बाद कोई व्यक्ति तुला, मकर या कुंभ राशि का हो और शनि जन्मकुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम स्थान पर हो तब शश योग का पूर्ण लाभ मिलता है  तथा व्यक्ति को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। दीर्घायु के साथ उत्तम आरोग्य का लाभ होने से व्यक्ति अपनी पूर्ण आयु का भोग सुखपूर्वक प्राप्त करता है। शश योग के कारण ऐसा व्यक्ति  जज, वकील या अभियंता जैसे ऊँचे पद का अधिकारी बनता है।  
  • कालसर्प योग शांति पूजा के पश्चात जिस व्यक्ति में राहु ग्रह मिथुन या कन्या राशि में स्थित हो तथा बुध, शुक्र, शनि जैसे मित्र ग्रह साथ हो ऐसे व्यक्ति के जीवन में संघर्ष कम होकर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
  • कालसर्प योग शांति पूजा के पश्चात जिस व्यक्ति में केतु ग्रह मीन या धनु राशि में स्थित हो तथा शुक्र और राहु जैसे मित्र ग्रह साथ हो ऐसे व्यक्ति को समाज में मान-सन्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  • कालसर्प योग की शांति के बाद जिन व्यक्तियों के जन्मांक में राहु १, २, ३, १० या १२ वें स्थान में हो उन्हें विशेष फल प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति के स्वास्थ संबंधी परेशानियां दूर होकर आरोग्य उत्तम स्थिति में बना रहता है। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में ऊँची सफलता मिलती है।

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जानिए कालसर्प पूजा का विधि, मुहूर्त ,सामग्री और त्रिम्बकेश्वर मंदिर में पूजा करने वाले गुरूजी की पूरी जानकारी पुरोहित संघ वेबसाइट के साथ।

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