॥ पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर ॥
“वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः”

रुद्राभिषेक क्या है? | रुद्राभिषेक के फायदे

रुद्राभिषेक क्या है? रुद्राभिषेक पूजा भगवान भोलेनाथ की परम कृपा को पाने के लिए की जाती है। भगवान शंकर को रूद्र रूप में प्राचीन काल से पूजा जाता है। इसी रूद्र रूप का पंचामृत से अभिषेक करना ही वास्तव में रुद्राभिषेक कहा जाता है। रुद्राभिषेक के फायदे कल्याणकारी है और इसका उच्चतम प्रभाव मंदिर में किए जाने पर दिखाई देता है।

रुद्राभिषेक करने की विधि हमें प्राचीन वेदों से प्राप्त होती है। रुद्राभिषेक पूजा विधि में प्रथम जल से शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है, जिसके पश्चात पंचामृत द्वारा रुद्राभिषेक किया जाता है। रुद्राभिषेक मंत्र के उच्चारण से वातावरण में सकारात्मक कंपनोंका निर्माण होता है। जिसके प्रभाव से सभी बाधाएँ नष्ट हो जाती है, एवं बिगड़े कार्य भी बन जाते है। रुद्राभिषेक शुभ मुहूर्त सुबह ४ बजे का माना जाता है। रुद्राभिषेक पूजन सामग्री में पंचामृत होना अति आवश्यक है।

रुद्राभिषेक पूजा सावन के महीने में करना अत्यंत लाभकारी है, इसके अलावा नागपंचमी, तथा प्रदोष के दिन भी इसका फायदा अधिक होता है। रुद्राभिषेक पूजा का सर्वाधिक लाभ महाशिवरात्रि के दिन ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा कराने से होता है। महाशिवरात्रि को रुद्राभिषेक करना भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है, ऐसा शिवमहापुराण में कहा गया है। इसीलिए विशेष रूप से हर साल नासिक में स्थित श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त आते है। 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में विशेष रूप से त्रिकाल पूजा का हर दिन आयोजन होता है, लेकिन महाशिवरात्रि का दिन यहाँ विशेष तौर पर मनाया जाता है। शिवरूद्राभिषेक, रुद्रयाग तथा अन्य पूजा त्र्यंबकेश्वर में किए जाते है। इन विशेष पूजाओं का आयोजन ताम्रपात्रधारी पण्डितजी द्वारा किया जाता है।

रुद्राभिषेक के फायदे:

१) जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में पितृ दोष का प्रभाव है, उसे नष्ट करने के लिए रुद्राभिषेक करना लाभकारी होता है।

२) जो व्यक्ति संतान की कामना रखता है उसे दूध के साथ शिवरुद्राभिषेक करना चाहिए।

३) जिस व्यक्ति को ग्रह-नक्षत्रों की बाधाओं से मुक्ति पानी है, उसने महाशिवरात्रि के विशेष दिन पर रूद्र मंत्रों से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करने से लाभ होता है।

४) जिस व्यक्ति की आर्थिक उन्नति रुक गयी है एवं आर्थिक तंगी से गुजरना पड रहा हो, ऐसे में द्वारा रूद्र मंत्रोच्चारण से शहद के साथ रुद्राभिषेक करने से लाभ होता है। 

५) जब कभी खेती के लिए जल की आपूर्ति न हो, वर्षा रुक गयी हो, तब गंगाजल से रूद्र मंत्रो का उच्चारण करके रुद्राभिषेक करने से जल की कमी दूर होती है। 

६) जिस व्यक्ति को घर की इच्छा हो उसने दही से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

७) धन-धान्य की प्राप्ति के लिए रूद्र मंत्रोच्चारण करते हुए प्रदोष के दिन गन्ने के रस द्वारा शिवरूद्राभिषेक करने से लाभ होता है।

८) जिस व्यक्ति को दीर्घ काल से हो रही बिमारी से छुटकारा प्राप्त करना है तो उसने इत्र मिले जल द्वारा जलाभिषेक करने से लाभ मिलता है।

९) जिन विद्यार्थियों को पढ़ाई याद नहीं हो पाती, स्मरणशक्ति कम है तथा शिक्षा ठीक से हो नहीं पा रही, उन्होंने जल एवं शक्कर के मिश्रण से रुद्राभिषेक कराने से उत्तम लाभ मिलता है।

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